लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 25 April 2017

कुछ पल के लिए ही सही , मेरी जिन्दगी में आ जाओ

कुछ पल के लिए ही सही, मेरी जिन्दगी में आ जाओ

कुछ पल  के लिए ही सही , मेरी जिन्दगी में आ जाओ
दे दो कुछ खुशनुमा पल मेरी जिन्दगी को भी, मेरी बाहों में समा जाओ

मेरी स्याह रातों को करो रोशन, पूनम के चॉद की मानिंद
दो पल  के लिए ही सही, मेरा आशियाँ रोशन कर जाओ

बहु आरज़ू थी तेरी मुस्कराहट हो , जिन्दगी मेरी
दो पल के लिए ही सही, मेरे घर का ऑगन महका जाओ

मैंने ख़वाबों में किये तेरे दीदार बहुत
दो पल के लिए ही सही, अब तो मेरे रूबरू हो जाओ

'किसी को पाना किसी को खोना, ये खुदा की मर्ज़ी
दो पल के लिए ही सही, मेरी इबादत का हिस्सा हो जाओ

मेरे खवाबों की मल्लिका हो तुम , ए जाने ग़ज़ल
दो पल के लिए ही सही , मेरी बाहों का सिराना हो जाओ.

कुछ पल  के लिए ही सही , मेरी जिन्दगी में आ जाओ
दे दो कुछ खुशनुमा पल मेरी जिन्दगी को भी, मेरी बाहों में समा जाओ

मेरी स्याह रातों को करो रोशन, पूनम के चॉद की मानिंद
दो पल  के लिए ही सही, मेरा आशियाँ रोशन कर जाओ





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