लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 10 April 2017

मंजिल की ओर एक कदम बढ़ा के तो देख - मुक्तक

१.

मंजिल की ओर एक कदम बढ़ा के तो देख

अगले दस कदम तेरा खुदा होगा तेरे साथ

२.

अपने अरमानों को कोशिशों के पंख लगाकर तो देख

तेरी कोशिशों को नसीब होगी एक खुशनुमा मंजिल


3.

अपने प्रयासों को अपनी मंजिल की अमानत कर के तो देख

तेरे प्रयासों को एक नायाब आसमां होगा नसीब


4.

अपने आँचल में खुद के लिए थोड़ी सी जगह बना के तो देख

रोशन होगा तेरा हर पल , और उस खुदा से तुझे होगा मुहब्बत का.


5.

अपने भीतर की इंसानियत , खुदा के बन्दों पर लुटा के तो देख

तुझ पर होगी दुआओं की बरसात और तुझे होगी जन्नत नसीब

६.


आब - ए - आईना में देखकर, खुद को यूं मायूस न कर

खुदा की निगाह में , अपनी कोशिशों से खुद को कर बुलंद

7.

इतना भी आसां नहीं है ,खुद को आदमी बनाए रखना

आदमी अपनी आदमियत बरकरार रखे , तो हो जाए उस खुदा का
शागिर्द

8.

उस आसमानी खुदा पर एक बार , यकीन कर के तो देख

जीते जी तुझे होगी जन्नत नसीब और होगा तुझ पर उस
खुदा का करम
















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