लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Friday, 5 December 2025

काली छाया का रहस्य - कहानी

 काली छाया का रहस्य - कहानी

रामगढ़ के लोग अपना जीवन मेहनत करके बहुत ही आराम से गुजार रहे थे | किन्तु इन दिनों एक काली छाया इन लोगों के डर का कारण बनी हुई थी | रामगढ़ गाँव में प्रवेश करने से पहले एक पगडंडी पड़ती थी | जिस पर से गुजरने पर एक काली छाया वहां से गुजरने वालों को दिखाई देती थी | जिसे देखकर लोग बेहोश हो जाते थे | बाद में होश आने पर पता चलता था कि उनके पास जो भी पैसे , कीमती सामान होता था वो सब गायब हो जाता था |

यह सिलसिला महीनों तक चलता रहा पर किसी को भी काली छाया का रहस्य पता नहीं चला | लोग उस रास्ते से गुजरते और काली छाया का शिकार हो जाते | काली छाया का लोगों के दिलों दिमाग पर यह असर हुआ कि उन्होंने नया रास्ता खोजने का विचार किया ताकि इस काली छाया से कहर से बचा ज सके | नया रास्ता खोजने के बाद शुरू के दिनों में काली छाया का कोई असर नहीं दिखाई दिया किन्तु दो दिन बाद फिर से वही सिलसिला शुरू हो गया | लोग उस रास्ते से गुजरते और काली छाया देखकर बेहोश हो जाते और फिर वही सामान और कीमती चीजें गायब |



अब तो बात इतनी बढ़ गयी कि लोगों का जीना दूभर हो गया | इसी बीच एक दिन उसी रस्ते से साधुओं का एक काफिला निकला और रामगढ़ आ पहुंचा | पर लोगों को यह जानकार आश्चर्य हुआ कि उस साधुओं पर काली छाया का कोई असर नहीं हुआ | वे सोचने लगे कि हो सकता है कि काली छाया पर इस साधुओं की शक्ति का असर हुआ होगा | इसलिए सभी साधू सुरक्षित रामगढ़ पहुँच गए | किन्तु इसके बाद फिर वही सिलसिला शुरू हो गया |

एक दिन शाम होने से पहले रामगढ का ही एक लड़का दौड़ा – दौड़ा गाँव की ओर आया और गाँव के सरपंच को उसने कुछ बताया | सरपंच उस लड़के की बात सुनकर अचंभित रह गया | सरपंच ने तुरंत गाँव के बहुत से लोगों को इकठ्ठा किया और दौड़ चले उस जगह से कुछ दूरी पर जहाँ काली छाया का प्रकोप दिखाई देता था | सभी ने ध्यान से देखा तो पता चला कि काली छाया वाली सड़क के दोनों ओर जो पेड़ लगे थे उन पर कुछ लड़के छिपे बैठे थे | और किसी के वहां से गुजरने का इंतजार कर रहे थे |

इसी बीच सरपंच ने अँधेरा होने पर दो लोगों को सड़क के दूसरी ओर से गाँव की ओर इसी सड़क से जाने को कहा | जैसे ही वे सड़क पर पहुंचे | पेड़ पर बैठे लड़कों में से दो लड़कों ने लेज़र बीम से काली छाया बनाई | जिसे देखकर दोनों लड़के बेहोश होने का नाटक करने लगे | उन्हें बेहोश देख पेड़ से सभी लड़के उतर आये | जैसे ही वे उस दोनों बेहोश लड़कों के पास पहुंचे गाँव के सरपंच और अन्य गाँव वासियों ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पकड़ लिया | पूछने पर पता चला कि उन्हें नशा करने की आदत थी जिसकी वजह से कोई उन्हें काम नहीं देता था | और नशा करने के लिए उन्हें ये रास्ता सूझा | सभी लुटेरों को पुलिस के हवाले कर दिया गया और जिस लड़के ने उन लुटेरों के बारे में सरपंच को जानकारी दी थी उसे सम्मानित किया गया |

अब रामगढ़ गाँव उस काली छाया के कहर से मुक्त हो चुका था | सारे रामगढ़ वासी ख़ुशी – ख़ुशी रहने लगे |


अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'


Sunday, 11 May 2025

अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम" के 15 बेहतरीन विचार

आओ दर्द मिटायें

 आओ दर्द मिटायें

उन जीवित सिसकती सांसों का
जो जीवित होते हुए भी जीवित नहीं हैं I

आओ दर्द मिटायें
उन भीगी आंखों का
जो ना चाहते हुए भी ग़मगीन हैं I

आओ दर्द मिटायें
उस सिसकते बालपन का
जो अभावों से ग्रसित हैं I

आओ दर्द मिटायें
उस बेबस चहरों की थकान का
जो चीथड़ों में लिपटे हुए हैं I

आओ दर्द मिटायें
उन जीवित रूहों का
जो जीवन को तरस रही हैं I

आओ दर्द मिटायें
उस मुस्कान रहित बालपन का
जो अथाह पीड़ा से ग्रसित है I

आओ दर्द मिटायें
उन तड़पती जीवित आत्माओं का
जो रोगों से ग्रसित हैं I

हर एक शख्स का , आशियां हो रोशन

हर एक शख्स का , आशियां हो रोशन

हर एक शख्स के , दिल मे हो सुकून I

हर एक शख्स की , पाकीजा हो शख्सियत
हर एक शख्स की , निगाह में हो मुहब्बत I

हर एक शख्स को मिले , मुहब्बत की छाँव
हर एक शख्स की , आँखों में हो शराफत I

हर एक शख्स का , उस खुद पर हो यकीन
हर एक शख्स का , इंसानियत पर हो यकीन II

अफवाहों का बाजार गर्म है

अफवाहों का बाजार गर्म है 

ज़रा संभलकर रहना

दुश्मन यहीं कहीं है आसपास

ज़रा संभलकर रहना

खुद के हौसले बुलंद रखना

यूँ ही किसी पर यकीन ना करना

पीर देंगे तुझे अपने ही

केवल खुद पर ही यकीन करना

Tuesday, 6 May 2025

विचार

 विचार

तुम्हारे द्वारा किए गए सत्कर्म ही तुम्हारा धर्म है, जिस दिन इस बात का तुम्हें बोध हो जाएगा उस दिन मानव धर्म तुम्हारे लिए सर्वोपरि हो जाएगा l सारे द्वेष मिट जाएंगे और तुम खुद को उस परमात्मा के समीप पाओगे l

अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

विचार

 विचार

तुम्हारे द्वारा किए गए सत्कर्म ही तुम्हारा वास्तविक धर्म है इस बात का जिस दिन तुम्हें बोध हो जाएगा उस दिन मानव धर्म तुम्हारे लिए सर्वोपरि हो जाएगा l तुम्हारे सारे क्लेश समाप्त हो जाएंगे और तुम खुद को उस परमात्मा के बहुत समीप पाओगे l

अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

मुझको हो हर पल तेरा एहसास

 मुझको हो हर पल तेरा एहसास

तू यहीं – कहीं है मेरे आसपास

हर पल जुबां पर हो तेरा नाम
तू ही सँवारे सबके काम

तेरे आदेश से ही रोशन जिन्दगी
तेरी मर्जी से होती रोशन कायनात

तू चाहे तो पल में राजा को रंक कर दे
तू चाहे तो पल में जिन्दगी बदल दे

एक तेरे चरणों का जो मिल जाए सहारा
दीदार हो जाए मोक्ष राह का द्वारा

तेरी चंचल चितवन पर रीझे हैं सभी
तेरे चरणों की लालसा में जी रहे हैं सभी

हमें भी अपने चरणों का दास कर ले
थोड़ी सी भक्ति का हमें भी वर दे

जियें तो बस एक तेरे नाम का सहारा लेकर
तू चाहे तो मुझे भी पार करा दे मालिक

मुझको हो हर पल तेरा एहसास
तू यहीं – कहीं है मेरे आसपास

हर पल जुबां पर हो तेरा नाम
तू ही सँवारे सबके काम


अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"

विचार

 विचार

जब तुम खुद से ही रूठ जाओ तो किसी रूठे को मनाने की कोशिश करना I यदि वो मान जाए तो समझ लेना तुम्हारी जिन्दगी दूसरों की अमानत हो गयी है I

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”