लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 3 February 2016

इंसान को हम इंसान गंवारा नहीं करते - मुक्तक

१.


इंसान को हम इंसान ,गंवारा नहीं करते

खुदा के बन्दे का ,हम सहारा नहीं बनते

कहने को तो कहते हैं, उस अल्लाह के बन्दे हैं हम

किसी मजलूम की जिन्दगी का ,सहारा नहीं बनते


२.

किसी भूखे को भोजन ,कराया नहीं करते

किसी प्यासे को पानी ,पिलाया नहीं करते

समझते हो खुद को ,उस खुदा का बंदा

किसी गिरते मुसाफिर को ,उठाया नहीं करते


3.


किसी की किस्मत को ,हम संवारा क्यूं नहीं करते

किसी की तरक्की को ,हम गंवारा नहीं करते

समझते हम भी हैं जिन्दगी ,चार दिन का है मेला

किसी की बेरंग जिन्दगी में ,हम रंग क्यूं नहीं भरते


4.


हमें पता है कितने मतलबी हैं ;दुनिया वाले

किसी के गम में ये शरीक क्यूं हुआ नहीं करते

आज हैं हम , कल का भरोसा नहीं हमको

चाहकर भी किसी के आंसू ,क्यूं पोछा नहीं करते




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