लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Sunday, 23 November 2014

घर आँगन खुशियाली न हो तो सोच बदलनी होगी

घर आँगन खुशियाली न हो तो
सोच बदलनी होगी 

घर आँगन खुशियाली न हो तो
सोच बदलनी होगी

पेड़ों पर फल ना आयें तो
सोच बदलनी होगी

जब लड़कपन बहका जाए तो
सोच बदलनी होगी

पुष्पों से जब मन भर जाए तो
सोच बदलनी होगी

खुद पर जब यकीन न हो तो
सोच बदलनी होगी

जीवन और लेखन में जब भेद करो तो
सोच बदलनी होगी

लेखक गर पाठक न हो तो
सोच बदलनी होगी


वक्ता जब श्रोता न हो तो
सोच बदलनी होगी

प्रकृति जब रौद्र  रूप में आये तो
सोच बदलनी होगी

पंक्षी जब मधुर स्वर न सुनाये तो
सोच बदलनी होगी

जब आदर्श स्वयं को खोजे तो

सोच बदलनी होगी 

जब संस्कारों पर आधुनिकता रुपी बादल छाने लगें तो
सोच बदलनी होगी

जेब नारी देवी सी न पूजी जाए तो
सोच बदलनी होगी


जब पुस्तकों पर से उठने लगे विश्वास तो
सोच बदलनी होगी

जब पंक्षी दिखें निराश तो
सोच बदलनी होगी

जब झोपड़ी में दीया न रोशन न हो तो
सोच बदलनी होगी

जीवन , जीवन सा न हो तो
सोच बदलनी होगी

देव पुरुष जब जन्म न लें तो
सोच बदलनी होगी

घर आँगन खुशियाली न हो तो
सोच बदलनी होगी

पेड़ों पर फल ना आयें तो
सोच बदलनी होगी




युगों की नींद से झकझोर कर जगा दो मुझे

युगों की नींद से झकझोर कर जगा दो मुझे 


युगों की नींद से झकझोर कर जगा दो मुझको
सो रही अन्तरात्मा की आवाज जगा दो मुझको

बिखर न जाएँ जिन्दगी में ख़ुशी के पल
आशा की नई किरणों से सजा दो मुझको
आंसुओं भरी रातों में , बिखरें न जिन्दगी के हंसी पल
एक मुटठी चांदनी हो , मेरी जिन्दगी का सबब

न जाने अश्क से आँखों में क्यों हैं आये हुए
इन आंसुओं के समंदर से बाहर निकाल लो मुझको

मेरे सपनों की शाम , न हो जाए कहीं
हो सके तो प्यार की सरिता में बहा दो मुझको

तिनके तिनके से सजाया है आशियाना मैंने
हो सके तो इस आशियाने में सजा दो मुझको

एक ख़त लिखा था मैंने तुझको ए मेरे सनम
कुछ फूल इन खतों के जवाब में भेज दो मुझको

आकाश से भी ऊँची थी मेरे सपनों की उड़ान
दुआ करो सपनों को मेरे , और आसमान नसीब हो मुझको

युगों की नींद से झकझोर कर जगा दो मुझको
सो रही अन्तरात्मा की आवाज़ जगा दो मुझको



विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता

विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता

विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता
भूल जाओ जिन्दगी के नकारात्मक पलों की भयावहता

चित्त को जीवन के सचेत तुम रखो
न होने दो विचारों को नकारात्मकता से अचेत

आत्मविश्वास की कमी पैदा करती जिन्दगी में भयावहता
अति आत्मविश्वास का होना जिन्दगी को पथभ्रष्ट करता

प्रयास करो व्याप्त हो जिन्दगी में आस्तिकता
गिरा देती है आदर्शों के स्तंभ , नास्तिकता

सृजनात्मक मन से आलोकित करो जिन्दगी के पल
करो इश्वर की तलाश , यही है जीवन दर्शन

जिन्दगी की और उम्मीद भरी निगाहों से देखो
जिन्दगी को बचपन की तरह संवारकर देखो

आकाश से ऊँची हौसलों की उड़ान हो तेरी
खुद पर स्वयं पर यकीन करके देखो

तिनके तिनके  से बनता है जिन्दगी का आसमान
खुद लिखो , खुद की जिन्दगी के नाम पैगाम

विनाश नहीं करती जिन्दगी की सकारात्मकता
भूल जाओ जिन्दगी के नकारात्मक पलों की भयावहता



समय

समय


समय पर जागो , समय पर सोओ
समय पर अपना काम करो

समय पर पढ़ना , समय पर लिखना
रोशन अपना नाम करो

समय पर पूजा , काम न दूजा
समय पर , प्रभु का ध्यान करो

समय है मानव जीवन की पूँजी
समय पर तुम विश्राम करो

समय पर बोलो , समय पर खेलो
मानव तन सम्मान करो

जीवन को चरितार्थ करो तुम
कर्म को समय प्रधान करो

समय जो छूटा , सब कुछ रूठा
समय को तुम प्रणाम करो

समय का वंदन , तेरा अभिनन्दन
समय को मूल्यवान करो

समय न देखे सुबह -  सवेरा
रहे न तुझसे कुछ भी अधूरा

समय पर तुम कुछ न छोड़ो
समय को समय के पलड़े में तोलो

समय जो हो जाए तेरा
समझो हो गया पूर्ण सवेरा

समय को तुम प्रणाम करो
समय को अपने मन ध्यान धरो



कोशिश करना आगे बढना

कोशिश करना आगे बढना

कोशिश करना आगे बढना , तेरा यही प्रयास हो
मुश्किलों से तू न डरना , हौसलों की आस हो

रहना सजग तुम हमेशा , खामोशी का न साथ हो
कीर्ति पताका फहरे तुम्हारी , सिर पर गगन विशाल हो

डरना नहीं तुम आँधियों से , साहस तुम्हारे साथ हो
विषाद से तुम दूर रहना , धैर्य तेरे साथ हो

आदर्शों की गंगा बहाओ , संस्कार तेरे साथ हो
हे मानव तुम हो प्रतापी , उस परमेश्वर की संतान हो

रखना बचा खुद को जहां से , सत्मार्ग तेरी राह हो
विरले विचारों से तू दमके , धरोहर तेरी अपार हो

सरिता सी पावन कीर्ति तेरी , महिमा तेरी अपार हो
चमके सितारा बुलंदियों पर , तुझ पर समय की न मार हो

हे मानव पुण्यमूर्ति  तुम , ह्रदय तेरा विशाल हो
चर्चा तेरी दोनों जहां में , उस प्रभु का तुझ पर हाथ हो


कोशिश करना आगे बढना , तेरा यही प्रयास हो
मुश्किलों से तू न डरना , हौसलों की आस हो


फूल अब खिलते नहीं , खुशबू का हमको पता नहीं

फूल अब खिलते नहीं , खुशबू का हमको पता नहीं 


फूल अब खिलते नहीं , खुशबू का हमको पता नहीं
भागते फिर रहे हैं हम , मंजिल का हमको पता नहीं

ज्ञान के पीछे भागते हम , पुस्तकें हमको भाती नहीं
मोक्ष की बातें करते हम , संस्कारों से हमारा नाता नहीं

गिर रहे हैं बार -  बार हम , संभलना हमको आता नहीं
देख रहे सबी चीरहरण , इंसानियत से हमारा नाता नहीं

पाने की इच्छा प्रबल हुई , हमको देना आता नहीं
पालना झुला रहे हैं सब , मातृत्व से हमारा नाता नहीं

काम प्रबल हुई भावनाएं , प्रभु से हमारा नाता नहीं
आध्निकता की गुलामी में डूबे , संस्कारों से हमारा नाता नहीं

चांदनी की चमक में डूबे , अन्धकार हमको भाता नहीं
विलासिता की चाहत में डूबे , संसार से हमारा नाता नहीं

मधुशाला का रुख करें हम , देवालय से हमारा नाता नहीं
जीवन की उलझन में उलझे , मोक्ष से हमारा नाता नहीं

फूल अब खिलते नहीं , खुशबू का हमको पता नहीं
भागते फिर रहे हैं हम , मंजिल का हमको पता नहीं


मुझे प्यार उनका मिला नहीं

मुझे प्यार उनका मिला नहीं 

मुझे प्यार उनका मिला नहीं , वो मेहरबान मुझ पर हुए नहीं
मै रातों को सोया नहीं , उन्हें मुझ पर प्यार आया नहीं

ये उनकी बदकिस्मती रही , वो मुझको पा सके नहीं
मैं उनको न पाकर भी खुश हूँ , मुझको इसका गिला नहीं

उन्हें अपने हुस्न पर गुरूर था , मुझे अपनी मुहब्बत का गुरूर था
वो मुझसे दूर दूर रहे , मैं उनके करीब - करीब रहा

वो मुझको रुला - रुला गए , उन पर इसका था असर नहीं
मैं दीवाना उनके प्यार का , उनके मुझसे था प्यार नहीं

उनके पहलू की चाह थी मुझको , उनको था मुझ पर यकीन नहीं
वो थी हुस्न की मल्लिका , उसको थी प्यार की कद्र नहीं

मैंने पूजा था उस देवी को , उसे मेरी थी परवाह नहीं
मैं उनकी यादों में रोऊँ , उसे आती मेरी याद नहीं

मुझे प्यार उनका मिला नहीं , वो मेहरबान मुझ पर हुए नहीं
मैरातों को सोया नहीं , उन्हें मुझ पर प्यार आया नहीं


बस जाओ मेरे मन में


बस जाओ मेरे मन में 

बस जाओ मेरे मन में , स्वामी होकर हे गिरधारी
धर्म राह पर ले चल मुझको , हे मुरलीधर हे बनवारी

तुम करुणा के सागर मेरे , बस जाओ मन में त्रिपुरारी
चरण कमल तेरे सब अर्पण , जीवन से तारो बनवारी

निष्ठुर होकर भुला न देना , चरण कमल जाऊं बलिहारी
चरण कमल में ले लो हमको , पुण्य करो जीवन गिरधारी

अभिलाषा बस इतनी मेरी , मुझको दरश दे दो बनवारी
मुश्किल में है नैया मेरी , पार लगा दो हे गिरधारी

हे पावन परमेश्वर मेरे , कर दो मुझको तुम संसारी
रत्नाकर सा ह्रदय हो मेरा , कुछ ऐसा कर दो बनवारी

मैं तेरे चरणों में आकर , हो जाऊं बलिहारी
उपकार तेरा मुझ पर हो इतना , हे मुरलीधर हे गिरधारी

तुझको पाकर जीवन मेरा , खिल जाए हो बनवारी
मुझको जीवन पार लगा दो , हे मुरलीधर हे बनवारी


बस जाओ मेरे मन में , स्वामी होकर हे गिरधारी
धर्म राह पर ले चल मुझको , हे मुरलीधर हे बनवारी


ए खुदा

ए खुदा

ए खुदा गर मैं तुझसे मिलूँ
तो मैं तुझसे पूछूं
उस आशियाने का पता
जहां
पलती है इन्सानियत
जहां
खिलते हों
इबादत के फूल
जहां
खुदा का हो ठिकाना
मैं तुझसे पूछूं
उस रास्ते का पता
जो है जन्नत नसीब करे
मैं पूछूं तुझसे
राहे इबादत , राहे इंसानियत का
पता और ठिकाना
जहां बसता हो
जिन्दगी का कारवाँ
हे खुदा करम कर
तभी अचानक मैंने सुना
ए बन्दे
तू मुझे ढूँढता , यहाँ और वहां
मैं तो तेरे दिल के
एक कोने में हो रहा बसर
ज़रा खोजकर तो देख
ज़रा अपने दिल से पूछकर तो देख
ज़रा मेरे होने का एहसास तो कर
ज़रा दो कदम इंसानियत की राह पर तो चल
ज़रा किसी गरीब की आँखों के
आंसू पोछकर तो देख
कोशिश कर
किसी यतीम के बच्चे को पालकर तो देख
यहाँ वहां मत भटक
ए बन्दे
तू अपने आस पास देख
और मुझे महसूस कर
जिनको तू अपने आसपास देखता है
मैं उन सभी के दिलों में हूँ
तू मुझे यहाँ वहां मत खोज
मैं तेरे पास हूँ
मैं बस यहीं हूँ
मैं हूँ उस पालने में लेटे
उस नवजात के साथ
लोरी 
सुनाती
 
उस माँ के साथ
मैं बसता हूँ तेरे चारों और
तू मुझे सभी में
खुद में महसूस कर
तुझे जन्नत नसीब हो
मेरे बन्दे