लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Friday, 3 January 2014

कवि


कवि

मैं कवियों को
खेत की मेड़ पर
खड़े वृक्षों की
संज्ञा देता हूँ
जो कि
खेत का हिस्सा नहीं होते
पर किसान को
थकान के बाद
विश्राम के लिए
छाँव देते हैं

कवि भी
समाज मे व्याप्त
कुरीतियों , कुविचारों एवं
भ्रांतियों से भटके हुए
लोगों को बाहर निकालकर
समाज मे एक अतिविशिष्ट
स्थान दिलाता है
वह रोतों को हंसाता है

वह उन्मुकतों को
बंधन युक्त  कर
सीमाओं का ज्ञान कराता है

वह भटके हुओं को
समाज का
महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है
ऐसा पथ – प्रदर्शक
कवि कहलाता है
कवि कहलाता है

Thursday, 2 January 2014

पाश्चात्य से हमने क्या सीखा



पाश्चात्य से हमने क्या सीखा

हवा में अजीब सी
गंदगी घुल गई है
मानव मस्तिस्क पर
विपरीत असर कर रही है
बात मैं हवा की
नहीं कर रहा हूँ
मैं हवा के माध्यम से
हमारे चारों ओर के
सामाजिक परिवेश की चर्चा
कर रहा हूँ
पाश्चात्य से बटोरा है हमने
कामग्रसित समाज
जिसने हमारी भावनाओं को
काम वशीभूत किया है
लिया है हमने पाश्चात्य से
अतिमहत्वाकांक्षी होने का मन्त्र
जिसने हमें हमारे सामाजिक
परिवेश में
अनुशासनहीन जीवन
जीने की ओर अग्रसर किया है
जाना है हमने पाश्चात्य से
न्यूक्लीयर युक्त
समाज में
जीवन जीने का तंत्र
इस तंत्र ने
मानव सभ्यता को
इसके अंत पर लाकर
खड़ा किया है
पाश्चात्य से हमने सीखा है
वर्णशंकर युक्त
नई पीढ़ी के साथ
जीवन जीने का मार्ग
यह मार्ग बड़ा आसाँ है
हमारे भारत धर्म
भारतीय संस्कृति को
अधोगति में
ले जाने के लिए
चाहिए तो था
हम बटोरते
कुछ ऐसा
पाश्चात्य संस्कृति से
जो उसे हमसे
कुछ मायनों में
आदर्श बनाती है
जैसे कि
हम उनकी ही तरह
ईमानदार होते
राष्ट्र के प्रति
समर्पित होते
राष्ट्रप्रेमी होते
अनुशासित होते
जो हमें सम्पूर्ण ,
मानव बनने में
सहायक होती
हम एक
आदर्श भारतीय समाज
का निर्माण कर पाते

हम आसमां पर चमकते
न कि भ्रष्टाचार ,
बलात्कार ,अपराध
की सूची में
सबसे ऊपर होते
सबसे ऊपर होते
सबसे ऊपर होते|



उन वीरों की गाथा गाओ



उन वीरों की गाथा गाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

मंगल चरण पड़े थे जिनके
इस धरा को पुण्य बनाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

देश प्रेम का पाठ सिखाया
तुम भी देश प्रेम जगाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

मर्यादा हो जीवन का गहना
सभी को यह मन्त्र बताओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

माँ- बाप की करे जो पूजा
ऐसे अपने भाग्य जगाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

धर्म मानवता हो हम सबका
आने वाली पीढ़ी को समझाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

संस्कार के दीप तले तुम
जीवन अपना रोशन पाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

राष्ट्र पर्व का हो सम्मान
युवा पीढ़ी को बतलाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

सुखदेव और भगत सभी को
अपने श्रद्धा सुमन चढ़ाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

दुर्गावती, लक्ष्मीबाई बन सब
इस देश में आस जगाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ

हो मानव तुम बन मानव तुम
इस धरा को पुण्य बनाओ

जीवन सफल बनाना है तो
उन वीरों की गाथा गाओ