लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Thursday, 2 January 2014

क्षणिकायें



क्षणिकायें
जी रहा हूँ मैं
वीरानियों में कुछ इस उम्मीद से
बदलेंगे सितारे मेरी किस्मत के
बस अब , अभी अगले ही पल
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जिन्दगी की राह के काँटों ने
मुझे पत्थरों पर चलना सिखा दिया          
इसी उम्मीद से जी रहा हूँ
कभी तो फूलों पर सैर का मौका मिलेगा

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संकल्पों की राह भी
बड़ी बेमानी होती है
अभी किया कि अगले पल छोड़ा
योग का ले आसरा
संकल्प को तू प्राण दे
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माना कि दुःख के राही सब मगर
बाहों का दे सहारा
दूर कर तू पीर सबकी
और अपनी जिन्दगी को राह दे



                       




जिए जा रहे हैं हम



जिए जा रहे हैं हम

कहानियां बनती जिन्दगी के
पात्र  हो
जिए जा रहे हैं हम
अपराधपूर्ण जिन्दगी के
कथाकार हो
जिए जा रहे हैं हम
संस्कृति को दिया
न हमने अब तक कुछ
कुठाराघात किये
जिए जा रहे हैं हम
मानव से मानव का अलगाव
सभ्यता को खंडहर कर
जिए जा रहे हैं हम
प्रकृति ने हमें दिया बहुत कुछ
फिर भी उस पर प्रहार कर
जीवन टटोलते
जिए जा रहे हैं हम
कुछ पाने की चाहत ने
हमें कुछ इस हद तक
गिरा दिया है
कि गिर – गिरकर
ऊँचा उठने की
नाकाम कोशिश
किये जा रहे हैं हम
परिवार, समाज को पीछे छोड़
आधुनिकता का दंभ भर
सभ्यता पर कलंक बन
जिए जा रहे हैं हम
प्रकृति के नियम तोड़
आधुनिकता ,समलेंगिकता ,
टेस्ट टयूब बेबी ,किराए पर कोख
जैसे नासूरों के साए में     
जिए जा रहे हैं हम
धरा पर आतंक पनपाकर
परमाणु हथियारों के साए में
जीवन पाने की
नाकाम कोशिश
किये जा रहे हैं हम
पत्रिकाओं में गंदगी परोस
आने वाली पीढ़ी को
उज्जवल भविष्य की ओर
ले जाने की नाकाम कोशिश
किये जा रहे हैं हम
इन अपराधपूर्ण व्यवहारों पर
अंकुश लगाना होगा
एक स्वस्थ समाज एवं
राष्ट्र का निर्माण करने
हमें अपनी संस्कृति
संस्कारों को अपनाना होगा
भावी पीढ़ी को बड़ों का सम्मान
शिक्षकों का सम्मान
सिखाना होगा
छोटों से प्यार ,शॉर्टकट को छोड़
सत्य मार्ग अपनाना होगा
सत्य मार्ग अपनाना होगा
सत्य मार्ग अपनाना होगा

Monday, 30 December 2013

वर्तमान किस तरह परिवर्तित हो गया है


वर्तमान किस तरह परिवर्तित हो गया है


वर्तमान किस तरह परिवर्तित हो गया है
टीचर आज का टयूटर हो गया है

जनता का रक्षक, भक्षक हो गया है
वर्तमान किस तरह परिवर्तित हो गया है

मानव आज का, दानव  हो गया है
सुविचार, कुविचार में परिवर्तित हो गया है

गार्डन अब युवाओं के दिल गार्डन – गार्डन करने लगे हैं
चौराहे - तिराहे लवर पॉइंट बनने लगे हैं

आज का शिक्षक, शिष्या पर लट्टू हो गया है
गुरु - चेले का रिश्ता भ्रामक हो गया है

स्त्रियों की संख्या, पुरुषों से कमतर हो गयी है
सभ्यता लुप्त प्रायः सी हो गयी है

समाज का पतन, देश का पतन हो गया है
चरित्र का पतन, आस्था का पतन हो गया है

लुंगी को छोड़, जीन्स का चलन हो गया है
कपड़े  छोटे हो गए हैं तन का दिखावा शुरू हो गया है

लडकियां, लड़कों सी दिखने लगी हैं लड़के, लड़कियों से दिखने लगे हैं
चारों ओर ब्यूटी पार्लर का चलन हो गया है

वर्तमान किस तरह परिवर्तित हो गया है
वर्तमान किस तरह परिवर्तित हो गया है