लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Monday, 19 December 2016

अच्छे दिन अब कब आयेंगे (व्यंग्य)



अच्छे दिन अब कब आयेंगे (व्यंग्य)

अच्छे दिन अब कब आयेंगे
चेहरे अब कब मुस्कायेंगे

दिल की पीर मिटेगी अब कब
रोते अब कब हंस पायेंगे

नोटबंदी में सोचा न था
लोग अपनी जान गंवाएंगे

खुद को नेता कहने वाले 
बैंक की लाइन में कब नज़र आयेंगे

बैंक से पैसे मिल नहीं रहे
मुन्नी की शादी हम कैसे कर पायेंगे

चाय के विषय पर हो रही बहस
पानी घर में होगा, तो चाय की चुस्की ले पायेंगे

गरीब सफ़ेद धन को तरसते
काला धन कहाँ से ले आयेंगे

काला धन और काला दिल
इसकी बात करें क्या भैया

स्विट्ज़रलैंड में पड़े काले धन का
दर्शन हमें करा दो भैया

कालेधन के कुबेरों के चक्कर में
पिसती जा रहे गरीब की दुनिया

काला धन तो एक बहाना है
अमीरों को और अमीर बनाना है

गरीब तरसते दो वक़्त की रोटी
अच्छे दिन का गीत गुनगुनाना है






Friday, 16 December 2016

वक़्त

वक़्त

वक़्त भी क्या , किसी को कुछ कहकर आता है
कभी ये खुशियों की सौगात लाता है, तो कभी ग़मों का सैलाब लाता है

वक़्त के तराजू को हाथों में , थाम लिया जिसने
उसकी कोशिशों को मंजिल का दामन , नसीब हुआ समझो

वक़्त की कसौटी पर , खुद को खरा साबित कर देखो
तेरे प्रयासों को और तुझे नसीब होंगे , आसमां के सितारे

वक़्त के परचम तले , खुद को संवारकर देखो
तेरी जिन्दगी , खुशियों से होगी रोशन

वक़्त से जो निभा ली , यारी तुमने
तेरी जिन्दगी को नसीब होंगी , हज़ारों खुशियाँ

अपने प्रयासों को , वक़्त का हमसफ़र कर देखो
तेरे प्रयासों को मंजिल का , आसमां होगा नसीब

तेरी कोशिशों को होगा नसीब , तेरी आरज़ू का साथ
गर  जो थाम लिया तूने, वक़्त का दामन

नसीब उसका संवारता है , जो चलता है वक़्त के साथ
किस्मत संवर  जाती है , रोशन होती है शख्सियत उसकी

तुम भी कुछ कदम , वक़्त का साथ लिए चलकर देखो
तुझे भी नसीब होगी , एक प्यारी सी मुस्कुराती जिन्दगी







इस ज़मीं को चलो सितारों से सजा दें


इस ज़मीं को चलो सितारों से सजा दें


इस ज़मीं को चलो , सितारों से सजा दें
क्यों दूर करें आसमां में , सितारों की तलाश

इस ज़मीं को चलो , चाँद सा कर दें रोशन
क्यों करें दूर आसमां में , चाँद की तलाश

इस ज़मीं को चलो फूलों की , खुशबू से कर दें रोशन
क्यों कहीं दूर उपवन में करें , खुशबू की तलाश

इस ज़मीं को चलो कर दें , बचपन की खुशबू से रोशन
क्यों कहीं दूर चलें और करें , बचपन की आहट की तलाश

इस ज़मीं को चलो कर दें , जीवन की खुशबू से रोशन
क्यों कहीं दूर चलें और करें , जीवन की तलाश

इस ज़मीं को चलो कर दें , इंसानियत के ज़ज्बे से रोशन
क्यों कहीं दूर करें इंसानियत के , रखवालों की तलाश

इस ज़मीं को चलो कर दें ,उस खुदा की इबादत से रोशन
क्यों कहीं दूर आसमां में करें , उस खुदा की तलाश

इस ज़मीं को उस खुदा की , जन्नत सा करें रोशन
क्यों कहीं दूर चलें और करें , जन्नत की तलाश