रात की चांदनी
रात की चांदनी
शांत भाव से
जिस तरह
जीविका रुपी
वनस्पतियों को
पुष्ट करती है
ठीक उसी तरह
मैं
मानव को
संस्कृति व संस्कारों,
आदर्शों को संजोते हुए
देखना चाहता हूँ
आने वाली
पीढ़ी को
सुविचारों से
पुष्ट करते हुए |
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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