मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |
Thursday, 10 April 2014
Wednesday, 9 April 2014
जब तुम्हारा अहंकार :- कुछ नए एहसास - मुक्तक
१.
जब तुम्हारा अहंकार साथ छोड़ने लगे
जब तुम्हें ज्ञान रुपी पंख मिलने लगें
जब तुम अपने लक्ष्य के समीप जाने लगो
समझना तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार होने लगी है
२.
हा जब तुम अपराजेय महसूस करने लगो
जब तुम्हारा ज्ञान तुम्हें अलंकृत करने लगे
जब तुम उन्नयन मार्ग पर बढ़ने लगो
तुम महसूस करना तुम उस परमेश्वर की शरण में हो
3.
जब तुम कवि की तरह रचना करने लगो
है तुम अपने लेखन से लोगों को प्रभावित करने लगो
जब तुम्हारे विचार पथ- प्रदर्शक का कार्य करने लगें
तुम ये एहसास करना तुम पर माँ शारदे का वरद हस्त है
4.
जार तुम्डारा अन्धकार, भक्ति रुपी मार्ग से मिटने लगे
जब तुम स्वयं को प्रश्न का सेवक समझने लगो
जब तुम असीम शांति का अनुभव करने लगो
समझना तुम पर देवों की असीम अनुकम्पा है
Friday, 4 April 2014
Thursday, 3 April 2014
Tuesday, 1 April 2014
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