लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Thursday, 28 November 2019

भीगो प्यार के रंग में


भीगो प्यार के रंग में

भीगो प्यार के रंग में
आई रे आई , होली आई रे
रंग गुलाल लगें सबको प्यारे
मनभावन त्यौहार हमारे
होली में भीगें तन सारे
कहीं पिचकारी की तान
कहीं रंगीले गुब्बारों की शान
काहिल गुलाबी गाल , तो कहीं
मतवालों की चाल
भीग रहे रंगों में बचपन
झूम रहे हैं सबके तन  - मन
रंगों का पावन त्यौहार हमारा
रंगीला लगता जग सारा
मस्ती में झूमें मतवाले
बच्चे, बूढ़े और जवान
सुन्दर नार
उस पर रंगों की बौछार
खूबसूरती में चार चाँद सजाते
भीगे तन – मन , भीगे जन  - जन
रंगों का यह त्यौहार निराला
गुलाल की बरसात अनोखी
जीवन उल्लास बरसाते
रंगों संग मिष्ठानों की मिठास
कहीं गुजियों , कहीं दहीबड़ों की आस
छोड़ दुशमनी का राग
भीगें प्यार के रंग में सब
चलो रंगों का संसार सजाएं
आओ मिल संग होली मनाएं
 भीगो प्यार के रंग में
आई रे आई , होली आई रे


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