लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 5 September 2017

अपने दिल की पीर

अपने दिल की पीर

अपने दिल की पीर , ज़माने से
छुपाता रहा हूँ. छुपाता रहूँगा मैं

'बहकर आये जो नीर , अधरों तक जिनके
उन आंसुओं को चुनता रहा हूँ.. चुनता रहूँगा मैं

गरीबी के आलम में गुजारे
बरसों बरस मैंने

अपनी कलम को गरीबों की आवाज़.
बनाता रहा हूँ  बनाता रहूँगा मैं

इंसानियत से मुंह मोड़ने वालों से
पट रही ये दुनिया
मैं इंसानियत की राह पर लोगों को
लाता रहा हूँ.. लाता रहूँगा मैं

वतन परस्ती का ज़ज्बा पाले हुए हूँ
मैं अपने दिल में

लोगों के दिलों में वतन परस्ती का ज़ज्बा
जगाता रहा हूँ : जगाता रहूँगा मैं

अपने दिल की पीर , ज़माने से
'छुपाता  रहा हूँ, छुपाता रहूँगा मैं

बहकर आये जो नीर , अधरों तक जिनके
उन आंसुओं को चुनता रहा हूँ  चुनता रहूँगा मैं




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