लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 2 November 2016

ग़ज़ल - उसने अपनी दिल की पीर को ,उसको दिखाया होगा

ग़ज़ल

उसने उसे अपनी दिल की , पीर को दिखाया होगा.
उसने उसे अपने , सीने से लगाया होगा

उसकी पीर ने उसके दिल में ,दर्द जगाया होगा
'सिसकती सांसं के संग ,वो मुस्कुराया होगा

इस बेदर्द जमाने मैं ,फुर्सत है किसे
खुदा ने उसे, उससे मिलाया होगा

आज कोई कहाँ ,किसी के लिए मरता हैं
उस खुदा ने उसे , बन्दा बनाया होगा

किसे कहें हम अपना , विसाले यार यहाँ
खुदा खुद बन्दा बनकर , यहाँ आया होगा

जला देते हैं जो औरों का घर , बताएं क्‍या
कितनी शिद्दत से उसने अपना , आशियाँ सजाया होगा

उसकी बेबाक मुस्कराहट बनी , मुहब्बत का सबब
किसी ख़ास वक़्त में खुदा ने .उसे बनाया होगा

व कया जाने दर्द , खुदा के बन्दों का.
खुदा ने उनको भी कभी , उनसे मिलाया होगा.







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