लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 7 November 2016

तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे - भजन

तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे

तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे
तेरी शरण में कान्हा , आऊँ तो आऊँ कैसे

खुद को तुझ पर , लुटाऊँ तो लुटाऊँ कैसे
तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे

पुष्प अर्पित करें या , मैं करूँ फल अर्पित
कैसे करूँ वंदना तेरी, मैं तुझको रिझाऊँ तो रिझाऊँ कैसे

मुझको तो ये भी , पता नहीं कान्हा
ओ मुरली वाले , मैं तुझको मनाऊँ तो मनाऊँ कैसे

मेरी गलतियों को ,क्षमा करना कान्हा
तुझकों अपने घर मैं , बुलाऊँ तो बुलाऊँ कैसे

तूने जो कर लिया ,मुझे सेवक अपना
तेरे चरणों को ,पखारूँ तो पखारूँ कैसे

तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे
हर पल मेरा ,तेरी सेवा में गुजरे

तेरी चरणों की धूलि , माथे पर लगाऊँ कैसे
तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे

खुद को तुझ पर , लुटाऊँ तो लुटाऊँ कैसे
तेरी महिमा के गुण , गाऊँ तो गाऊँ कैसे


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