लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 13 January 2016

खुशियों का गर संसार बसाना है

खुशियों का गर संसार बसाना है

खुशियों का गर संसार बसाना है.
जीवन को संस्कृति . संस्कारों से सजाना है.

प्रयासों को जीवन का मर्म बनाना हैं
'गर जिन्दगी को सपनों से सजाना है.

जीवन को गर उत्कर्ष मार्ग पर ले जाना हैं
जिन्दगी मैं तृष्णा , कामना, अभिलाषा  पर काबू पाना है

जीवन को गर अभिनन्दन राह पर ले जाना है.
जीवन मैं केवल सद्धिचार, और आदर्श को बसाना है.

जिन्दगी को गर अहंकार के दावानल से  बचाना है.
जीवन मैं सहिष्णुता और सदाचार को अपनाना हैं

जिन्दगी मैं गर आत्मविश्वास पाना है.
जिन्दगी मैं अर्थपूर्ण प्रयासों की गंगा बहाना है.

जिन्दगी को गर देश हित बलिदान करना है.
जिन्दगी को धर्म से ऊपर उठ देश हित मरना है.

जिन्दगी को गर राष्ट्रहित  , नवरत्र से अलंकृत करना हैं.
जिन्दगी को सम्पूर्ण रुप से देश हित कर्तव्य करना है.

जिन्दगी को गर सलिला सा पावन हो बहना है.
जिन्दगी को केवल आदर्शपूर्ण रहीं से हो गुजरना हैं.

जिन्दगी को गर उपवन सा खिलना है.
जीवन को केवल और केवल कोमल वाणी रुपी पुष्पों  से सीचना हैं

खुशियों का गर संसार बसाना है.
जीवन को संस्कृति . संस्कारों से सजाना है.

प्रयासों को जीवन का मर्म बनाना हैं
'गर जिन्दगी को सपनों से सजाना है.


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