लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) से हैं और अभी डेराबस्सी (पंजाब) में रह रहे हैं |

Thursday, 4 April 2013

मेरे गुरु

मेरे गुरू





वह दिन मुझे आज भी
याद है
जब मुझे भी ज्ञात नहीं था
कि जिन पुण्यमूर्ति 
के सानिध्य में जीवन के
बाल्यकाल को जी रहा हूँ मै

मेरे जीवन का सत्मार्ग
बन मुझे
जिंदगी के चरम  पर
पहुंचा
मेरे जीवन को सार्थक
बना देगा
ये
शायद
मेरे अंदर की भावना थी
या मेरी कर्मपरायणता
या फिर
उस परमपूज्य
परमात्मा
का
अप्रत्यक्ष आदेश
जिसने मुझे उनकी ओर
सेवा भाव से प्रेरित
कर
उनका आशीर्वाद
प्राप्त करने का
सुअवसर प्रदान किया
मुझे
उनकी वैराग्यपूर्ण छवि
अपनी ओर आकर्षित
करती थी
साथ ही उनका
लोगों के
प्रति मानवपूर्ण
व्यवहार
बच्चों के प्रति
दुलार
धार्मिक अनुष्ठानों में उनकी
आस्था
परमात्मा से उनका प्रत्यक्ष मिलन
समय – समय
पर उनके द्वारा
छोटे – छोटे
उद्धरण के माध्यम से
दी गई सीख
आज भी मेरे जीवन को
उदीयमान
करती है
सभी धर्मों में उनकी आस्था
धार्मिक ग्रंथों में
समाहित विचारों पर उनका अटूट विश्वास
मुझ पर
उनका पड़ता
अनुकूल प्रभाव
उनके
हर क्षण
हर पल कि
गतिविधियां
किसी भी जीव को
अपना जीवन पूर्ण
करने
के लिए काफी था
मै धन्य हूँ उन पुण्यमूर्ति
आत्मा का
जिनके सुविचारों
संदेशों का प्रसाद पाकर
अपने आपको आनन्द विभोर
पा रहा हूँ मैं
मेरी जीवन की
प्रत्येक
उपलब्धि
उस परमपूज्य
गुरुदेव
की आराधना
व साधना प्रतिफल  है
मै उस पवित्र
आत्मा की वंदना करता हूँ
उसे साष्टांग
प्रणाम करता हूँ
जय गुरुवे नमः |     



प्यार से दुश्मनी को मिटा दंगे हम



प्यार से दुश्मनी को मिटा दंगे हम
प्यार की खुशबू से सारे जहां को नहला दंगे हम
फिर कोई कह नहीं सकेगा
वो ओसामा है वो सद्दाम है
हर तरफ नानक, कबीर, गौतम की वाणी
गुंजा दंगे हम
कौन कहता है कि
अजान सुनाई नहीं देती
घर घर में कुरान
खिला दंगे हम
लगने लगेंगे हर जगह
धर्म के मेले
सारे जहां को
धर्मगाह बना दंगे हम
एकता हर मोड़ पर हर जगह
दिखाई देगी तुमको
लोगों को एकता के सूत्र में
पिरो दंगे हम
भारत वतन है एकता की
खुशबू का
सारे जहां को
इसका हिस्सा बना दंगे हम
कि किस्सा –ऐ - जन्नत सुना होगा सबने
कि हर गली हर कूचे को
जन्नत बना दंगे  हम
कि धरती है प्रकृति का
नायाब तोहफा
चारों और हरियाली
बिछा दंगे हम
पालते हैं हम
अपने दिल में
जज्बा ऐ वतन
कि भारत माँ के लाल बनकर
दिखा दंगे हम
कि हर गली हर कूचे को
आतंकवाद से बचा कर रखना  
कूद पड़े जो मैदान में तो
देश के लिए सर कटा दंगे हम
वतन पर मिटने की
तमन्ना रही सदियों से
कि हर एक बूँद कतरा बन
देश पर लुटा दंगे हम
मुझे प्यारा है मेरा वतन
मुझे प्यारा है मेरा चमन
इस देश पर अपना सर्वस्व
लुटा दंगे हम
इस देश पर अपना सर्वस्व
लुटा दंगे हम
इस देश पर अपना सर्वस्व
लुटा दंगे हम