लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 22 October 2016

आस का पंछी, तू उड़ चला है कहाँ

आस का पंछी , तू उड़ चला है कहाँ

आस का पंछी , तू उड़ चला है कहाँ
मेरा मन तुझको ढूँढता है , यह से वहां

कई ख़वाब , मेरी निगाहों के गवाह हुए
आस का पंछी चुराकर ले गया , न जाने कहाँ 

मेरे प्रयासों के समंदर मैं था ,पानी बहुत
जाने क्या हुआ आस के पंछी को , किनारा न मिला

मेरी कोशिशें न जाने , क्‍यों नाकाम हुईं
जाने किसी की काली नज़रों का , असर जो हुआ

आस के पंछी के ख़वाबों की , कोई सीमा न थी.
जाने क्यों आस के पंछी के रूवाबों को , किनारा न मिला

'बिखरे - बिखरे स्वप्न हुए , आस के पंछी के ख़्वाब 
न जाने किसकी नजर का ये , इशारा हुआ

पाक दामन लिए आस के पंछी को , पाला मैंने
किस्सा होकर रह गए , मेरे सभी प्रयास

आस का पंछी तड़पता रहा , यहाँ और वहां
कोई तो आस जगाओ , मैरे आस के पंछी के दिल में

कोई तो राह दिखाओ , मेरे आस के पंछी को
आस का पंछी , तू उड़ चला है कहाँ

आस का पंछी , तू उड़ चला है कहाँ
मेरा मन तुझको ढूँढता है , यह से वहां

कई ख़वाब , मेरी निगाहों के गवाह हुए
आस का पंछी चुराकर ले गया , न जाने कहाँ 



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