लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 6 April 2015

इस दिल को किस तरह से मनाऊँ मैं जाने जाँ

इस दिल को किस तरह से मनाऊँ मैं जाने जाँ

इस दिल को किस तरह से मनाऊँ मैं जाने जाँ
मैं जानता हूँ इसके रूठने की वजह क्या
इसको हुई है तुमसे मुहब्बत मेरी जाँ
इसकी न कोई खता , न तेरे हुस्न की खता

दिल की बात दिल ही समझे हैं जाने जाँ
न मेरे बस में है कुछ , न तेरे बस में जाँ
दिल की हसरत को रोकूँ , तो मैं किस वजह
जब दिल से दिल को मिल गयी राहत ऐ जाने जाँ

पागल समझ के लोग पत्थर मुझे मारें
एक तेरी आरज़ू में फिर रहा हूँ मेरी जाँ
हसरते दिल के आगे किसी की चलती नहीं
अब तुम ही बताओ हम क्या करें मेरी जाँ

बतायें क्या हाल इस दिल का , कि ये सुनता नहीं मेरी
कि बतायें हम क्या इसको , क्या ये सुने मेरी
कि रोकें क्या इसे और क्या , कि इसको तुम पर मरने दें
कि तेरे चाँद से मुखड़े पर , ये मर मिटा जानम

इस दिल को किस तरह से मनाऊँ मैं जाने जाँ
मैं जानता हूँ इसके रूठने की वजह क्या
इसको हुई है तुमसे मुहब्बत मेरी जाँ
इसकी न कोई खता , न तेरे हुस्न की खता


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