लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 1 September 2014

अपने चरणों की धूलि बना लो

अपने चरणों की धूलि बना लो

अपने चरणों की धूलि बना लो
हे त्रिपुरारी हे बनवारी
अभिलाषा पूरी करो मेरी
चरण कमल जाऊं बलिहारी

निर्मल , पावन हो मेरी काया
अहंकार की पड़े ना छाया
मेरा भाग्य बनाओ बनवारी
हे त्रिपुरारी हे बनवारी

सलिला सा पावन हो जीवन
रत्नाकर सा हो मेरा मन
बैरागी सा हो अंतर्मन
राग भक्ति का जगाओ गिरिधारी

शुभचिंतक हो जाऊं सबका
दास बनूँ मैं तेरे दर का
सूर्य सा तेज भरो हे मुरारी
हे त्रिपुरारी हे बनवारी

वायु सा पावन मुझे कर दो
मुझको ज्ञान का वर दो
हंसवाहिनी कृपा करे बनवारी
हे त्रिपुरारी हे बनवारी



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