लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 29 December 2013

भजन


भजन
रूप श्याम का मेरे मन को भाया
रूप मुरली मनोहर का भाया
वो जबसे जगत में आया
सबका बेड़ा पार लगाया
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

उसकी बातें मेरे मन को भायें
मन में जीवन ज्योति जगायें
उसकी महिमा का अंत नहीं है
उसके जैसा संत नहीं है
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

बातें उसकी अमृत बरसायें
जीवन में अमृत घोल जायें
वो तो है सबका सहारा
करता सबका जीवन उजियारा
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

बनाई है दुनिया उसी ने
राह सच्ची दिखाई उसी ने
मोक्ष पाने का रास्ता दिखाया
मानव के समझ में आया
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

उसकी लीलायें लगतीं निराली
अब माखन चुराने की बारी
हो बालपन या फिर युवापन
हर एक रूप सभी को है भाया
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

धर्म का पाठ है सबको पढ़ाया
सत कर्म से परिचय कराया
रूप अर्जुन को अपना दिखाया
मन मस्तिस्क पर है ये छाया
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

कृष्ण की महिमा सब मिल गायें
जीवन को अपने सफल बनायें
इस जीवन में मोक्ष पायें
प्रभु की गोद में जगह बनायें
रूप श्याम का मेरे मन को भाया

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