लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 25 December 2013

हिंदी राजभाषा


हिंदी राजभाषा

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

जैसी लिखी ये जाए
वैसी पढ़ी ये जाए

कर्णप्रिय ये भाषा
इससे नहीं निराशा

शब्दों को है संजोये
सभी भाषाओं को है पिरोये

विश्व धरा पर हमारी
पहचान है ये भाषा

विश्व प्रचलित ये भाषा
इससे नहीं निराशा

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

इस परे हमें हो गर्व
चाहे समर्पण सर्व

इसका करैं हम सम्मान
हमारी यह पहचान

अन्य भाषाओं को
अपनाया है इसने

विश्व बंधुत्व का सपना
दिखाया है इसने

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा

नेपाली हो या उर्दू
फारसी हो या अंग्रेजी

आँचल में अपने सबको
दुलारती ये भाषा

पुकारती है हमको
मातृभूमि हमारी

करो वंदना सब मिलकर
राजभाषा हिंदी हमारी

हो जाए जाने सफल
करैं मातृभाषा का आचमन

इसे विश्व रंग पहनायें
विश्व धरा पर खिल ये जाए

हिंदी है राजभाषा
इससे नहीं निराशा




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