लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 15 March 2017

मुहब्बत के राही

मुहब्बत के राही

मुहब्बत के राही ,जिन्दगी को यूं तनहा गुजारा नहीं करते
मिले जो दामन किसी का , उसे ठुकराया नहीं करते |

चलते हैं जो मुहब्बत की राह, किसी को यूं सताया नहीं करते
मुहब्बत के राही जिन्दगी को यूं तनहा गुजारा नहीं करते |

गुजारिश उस खुदा से , कोई गुमराह न हो
जीते हैं जो गुमसुम , वो किसी को रुलाया नहीं करते |

मुहब्बत के राही मुहब्बत करने वालों को , यूं भरमाया नहीं करते
खुदा के चाहने वाले , किसी को यूं भटकाया नहीं करते |

जीते हैं जो खुद , सिसकती सांसों के साथ
वो किसी गमगीन को , यूं सताया नहीं करते |

इंसानियत के रखवाले , किसी को यूं बीच राह छोड़ा नहीं करते
बीती बात बिसारिये , यूं दुश्मनी को दिल से लगाया नहीं करते |

मुहब्बत के राही जिन्दगी को यूं गुजारा नहीं करते
मिले जो दामन किसी का , उसे ठुकराया नहीं करते |

चलते हैं जो मुहब्बत की राह, किसी को यूं सताया नहीं करते
मुहब्बत के राही जिन्दगी को यूं गुजारा नहीं करते |

मुहब्बत के राही ,जिन्दगी को यूं तनहा गुजारा नहीं करते
मिले जो दामन किसी का , उसे ठुकराया नहीं करते |

चलते हैं जो मुहब्बत की राह, किसी को यूं सताया नहीं करते
मुहब्बत के राही जिन्दगी को यूं तनहा गुजारा नहीं करते ||


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