लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Friday, 15 April 2016

मुझे अपने दर का चिराग कर लो ,मेरी इबादत क़ुबूल कर लो


मुझे अपने दर का चिराग कर लो, मेरी इबादत कुबूल कर लो

मुझे अपने दर का चिराग कर लो, मेरी इबादत कुबूल कर लो
जी रहा हूँ मैं एक तेरे दम से, मेरी दुआएं कुबूल कर लो

'करम करो मेरे मौला मुझ पर, मेरी जियारत कुबूल कर लो
मेरे गुनाहों को माफ़ करना, मेरी मुहब्बत कुबूल कर लो

मेरे खुदा मुझे फ़रिश्ता कर दो, मेरे रूवाबों को पाकीज़ा कर दो
अपनी परवरिश में लेना मुझको, अपने करम से नवाजो मुझको

मेरे अल्फाजों को पाकीजगी अता करना, मैं जो भी लिखूं उसे इबादत कर दो
मेरे प्रयासों को अपनी अमानत करना, मेरी कोशिशों को कुबूल कर लो

मेरे दामन को पाक--साफ़ रखना, मेरी खुशियों को आसमां दे दो
मेरी जिंदगी को मकसदे-इंसानियत करना, मैरी ये आरज़ू कुबूल कर लो

मैं प्यासा हूँ दीदार का तेरे, मेरी आरजू पर करम कर दो
एक पत्र के लिए ही सही, अपने दीदार से नवाज़ दो मुझको

मेरी मुहब्बत कुबूल कर लो, मुझे भी अपना अज़ीज़ कर लो
करम से तेरे मैं हूँ रोशन, मुझको अपने करीब रख लो

चॉँद-तारों की आरजू नहीं मुझको, मेरी खवाहिशों को कुबूल कर लो
जी रहा हूँ मैं तेरे दम से, मेरा मुकददर रोशन कर दो



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