लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 13 April 2016

कान्हा - भजन

 कान्हा - भजन 


कान्हा मुरली बजावे मधुबन में, कान्हा रास रचावे वृंदावन में 
गौअन को चरावे कान्हा मथुरा में , राधा संग खेले वृन्दावन में

कान्हा ,गिरधर बनकर आ जाओ , हम ढूंढें तुमको जबलपुर में
निर्धन को धनी बना जाओ, हम ढूंढें तुमको जबलपुर मैं

कान्हा पास हमारे आ बैठो , दिल लगता नहीं अकेले में
कान्हा भक्ति का मुझे सहारा दो, दिल लगता नहीं इस दुनिया में

मंगल हित कान्हा आ जाओ, हम भक्त पड़े तेरे चरनन में
हमको तुझसे है प्यार हुआ , दो पल को आ जाओ जबलपुर मैं

तेरी रहमत पर है यकीन हमको, है भाग्य तुम्हारे हाथों में
तेरे दर्शन के अभिलाषी हम, प्रभु अब तो आओ जबलपुर में

तेरे चरणों में बलि- बलि जाएँ, कुछ ऐसा कर दो जीवन में
मोक्ष का अमृत मिले हमको, अब दरश दिखाओ जबलपुर में

कान्हा मुरली बजावे मधुबन मैं, कान्हा रास रचावे वृंदावन मैं
गौऊन को चरावे कान्हा मथुरा में , राधा संग खेले वृन्दावन मैं






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