लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 18 April 2016

सिसकती साँसों का व्यापार न कर

सिसकती साँसों का व्यापार न कर

सिसकती सांसों का व्यापार न कर
गमगीनों को तू और गमसार न कर

एतबार किये बैठे हैं जो तुझ पर  
उनके विश्वास को तू तार-तार न कर

बेचैन सॉसों के साथ जी रहे हैं वो
उनकी बेचैन जिंदगी को और बेचैन न कर

'बेक़सूर हैं वो उन्हें तुझ पर है यकीन
उनके इस यकीन को तू तार-तार न कर.

बेसुध से धो रहे हैं वो खुद को
'बदनसीब कह उनको रुसवा न कर

बंदगी उनका ईमान हो जाए.
इतना तो उन पर करम कर

आदिल कर तू उनको अपना बना
इश्क़े -इबादत उनकी जागीर कर

बदनसीब हैं वो , कया यहीं कम हैं
उनका दामन खुशियों से भर

जिंदगी के अँधेरे साथ लिए जी रहे हैं वो
उनका आशियों भी जन्नत सा रौशन कर

उन्हें मुहब्बत है तुझसे, ये इज़हार करें भी तो कैसे
कोई तरकीब मेरे मौला , उनको भी अता कर.



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