लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 30 November 2014

मेरे मौला – मेरे मौला


मेरे मौला – मेरे मौला


रोशन हो जाए हर एक शख्स मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
रोशन फिजां महके , तेरा नूर महके मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
तसव्वुर में भी तेरा दीदार महक उठे मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
तेरी रहमत तेरा करम हो सब पर मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
तोहफा – ए – इबादत सबको अता कर मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
खिले हर एक शख्स तेरे नूर से मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
नफरत की दीवार मिटा दे मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
क़ुबूल है तेरा हर एक करम मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
नासमझ हैं हम , माफ़ कर हमको मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
परवरिश करना अपना समझ कर हमको मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
फ़साना न हो जायें हम , संभाल लेना हमको मेरे 
मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
तुझ पर हमारा एतबार बरकरार रहे मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
तेरे दर पर आये हैं तेरे दीदार को मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
बंदगी क़ुबूल करना , रहम करना मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
आदिल है तू, नूर बख्श हमको मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
जुबां पर सुबह – शाम नाम हो तेरा मेरे मुओला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
रोशन हो जाए हर एक शख्स मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला 
 
रोशन फिजां महके , तेरा नूर महके मेरे मौला
मेरे मौला – मेरे मौला


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