मुक्तक
जब उजाड़ उपवन में भी तुम्हें पुष्पों की कतार नज़र आने लगे
जब अभाव के दौर में भी तुम्हें सुख का एहसास होने लगे
जब किसी के दुःख में तुम्हें अपना सुख नागवार गुजरने लगे
तब समझना तुम्हारा ह्रदय उस परमात्मा की असीम कृपा का पात्र हो गया है |
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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