लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 29 May 2021

मुक्तक

 

१.

खामोश जुबां की अपनी जुबान होती है

बिना कहे भी बहुत कुछ कह जाती है


२.

वो महसूस तो करते होंगे, मेरे दर्द -
दिल की आवाज़

यूं ही नहीं कोई , किसी से ख़्वाबों में
रूबरू होता

3.


उसके दिल की धड़कन को मैं आज भी
करता हूँ महसूस

उसे दिल की गहराइयों से चाहा था
मैंने एक रोज


4.



किसी के दर्द को अपना बना लूं तो
अच्छा हो

किसी रोते हुए को दो पल के लिये
हँसा लूं तो अच्छा हो

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