लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Wednesday, 11 March 2015

शरणागत मैं शरण तुम्हारी

शरणागत मैं शरण तुम्हारी

शरणागत मैं शरण तुम्हारी
तुम पर मैं जाऊं बलिहारी
बंधन मुक्त करो मेरे प्रभु जी
चरण कमल पर मैं बलिहारी

शरणागत मैं शरण तुम्हारी
तुम पर मैं जाऊं बलिहारी

प्रेम भाव से पूजूँ तुझको
भक्तिभाव से निहारूं
मन मंदिर में बस जाओ तुम
आया मैं शरण तुम्हारी

शरणागत मैं शरण तुम्हारी
तुम पर मैं जाऊं बलिहारी

क्षमा करो अपराध हमारे
दुर्गुण हों सब दूर हमारे
संयम का तुम मार्ग दिखाओ
कर्तव्य राह पर लेकर आओ

शरणागत मैं शरण तुम्हारी
तुम पर मैं जाऊं बलिहारी

सद् व्यवहार करूँ मैं प्रभु जी
सत्य राह चलूँ मैं प्रभु जी
दुष्ट जनों से हमें बचालो
अपनी शरण में हमें लगा लो

शरणागत मैं शरण तुम्हारी
तुम पर मैं जाऊं बलिहारी

विचलित न हो मन मेरा
भक्ति मार्ग से मुंह न मोड़ें
रक्षक तुम बन जाओ मेरे
पाप हरो मैं शरण तुम्हारी

शरणागत मैं शरण तुम्हारी
तुम पर मैं जाऊं बलिहारी





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