लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 21 October 2013

पाप – पुण्य

पाप – पुण्य

पाप पुण्य के चक्कर में
मत पड़ प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

परिणाम की चिंता में
नींद हराम मत कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

जीवन बहती धारा का
नाम प्यारे 
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

आत्मा पवित्र कर
परमात्मा में लीन हो प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

सद्चरित्र धरती पर
जीतता हर मुकाम है
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

निराशा के झूले में
झूलना मत प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

योग का आचमन कर
आत्मा को पुष्ट कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

जीवन बहती नदी है
विश्राम न कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

मन है चंचल पर
आत्मा पर अंकुश
लगा प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे



जीना है इस धरा पर तो
पुण्यमूर्ति बन प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

सत्कर्मीय एवं पूजनीय को
परमात्मा दर्शन देते प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

जीवन  लगाम कस
अल्लाह को सलाम कर प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे



बंधनों के मोह में
तू न पड़ प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

शांत स्वभाव और
मृदु वचन बोल प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

निर्बाध तू बढ़ा चल
भक्ति का आँचल पकड़
जीवन राह विस्तार कर ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

साँसों की डोर की मजबूती का
कोई भरोसा नहीं है
उड़ सके तो भक्ति के आसमां में
उड़ ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

अधर्म की राह छोड़
धर्म पथ से नाता जोड़
किस्मत अपनी संवार ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे

छूना है आसमां और पाना है
उस पुण्यमूर्ति परमात्मा को
जीवन को अपने कर्म पथ पर
निढाल कर ले प्यारे
कर्म कर कर्म कर
कर्म कर ले प्यारे









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