लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 14 October 2013

तुम न छेड़ो कोई बात

तुम न छेड़ो कोई बात

तुम न छेड़ो कोई बात
न सुनाओ आदर्शों का राग
मार्ग हुए अब अनैतिक   
हर सांस अब है कांपती
कि मैं डरूं कि वो डरे
हर मोड़ अब डरा – डरा
कांपते बदन सभी
कांपती हर आत्मा
रिश्ते सभी हुए विफल
आँखों में भरा वहशीपन
हर एक आँख घूरती
आँखों की शर्म खो रही
बालपन न बालपन रहा
जवानी बुढापे में झांकती
आदर्श अब आदर्श न रहे
न मानवता मानवता रही
अब राहों की न मंजिलें रहीं
डगमगाते सभी पाँव हैं
रिश्तों की न परवाह है
संस्कृति का न बहाव है
संस्कारों की बात व्यर्थ है
नारी न अब समर्थ है
नर , पशु सा व्यर्थ जी रहा
व्यर्थ साँसों को खींच है रहा
कहीं तो अंत हो भला
कहीं तो अब विश्राम हो
कहीं तो अब विश्राम हो
कहीं तो अब विश्राम हो


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