लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 28 August 2021

आज मैं देख लूं तुझे , जी भर के जरा – ग़ज़ल

 आज मैं देख लूं तुझे , जी भर के जरा – ग़ज़ल

आज मैं देख लूं तुझे , जी भर के जरा
आज मैं छू लूं तुझे , जी भर के जरा

तेरे पहलू में चंद पल गुजारूं मैं , जी भर के जरा
तुझको अपना बना लूं , जी भर के जरा

मुहब्बत के गीत गा लूं मैं , जी भर के जरा
तेरी आशिक़ी में डूब जाऊँ मैं , जी भर के जरा

बाहों में बाहें सजा लूं , जी भर के जरा
चलो तुमको मना लूं मैं , जी भर के जरा

तेरे नजदीक आ लूं मैं , जी भर के जरा
तुझको मैं तुझसे मिला दूं मैं , जी भर के जरा

तेरा तुझसे परिचय करा दूं , जी भर के जरा
इस खुशनुमा पल को अपना बना लूं मैं , जी भर के जरा

तेरी चाहत में खुद को मिटा लूं , जी भर के जरा
जी भर के जरा नज़रों से नज़रें मिला लूं मैं , जी भर के जरा

इश्क़ की महफ़िल सजा लूं , जी भर के जरा
तेरी आशिक़ी में सब कुछ भुला दूं , जी भर के जरा

आज मैं देख लूं तुझे , जी भर के जरा
आज मैं छू लूं तुझे , जी भर के जरा

तेरे पहलू में चंद पल गुजारूं मैं , जी भर के जरा
तुझको अपना बना लूं , जी भर के जरा

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