लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 30 August 2021

यादों का सफ़र खुशनुमा हो, कुछ ऐसा कर जाएँ

 यादों का सफ़र खुशनुमा हो, कुछ ऐसा कर जाएँ

यादों का सफ़र खुशनुमा हो, कुछ ऐसा कर जाएँ
किसी का भी दिल न टूटे , कुछ ऐसा कर जाएँ

बदनुमा यादों को भुला सकें , कुछ ऐसा कर जाएँ
सबके दिलों में राज कर सकें, कुछ ऐसा कर जाएँ

बिखर न जाएँ आस के मोती, कुछ ऐसा कर जाएँ
रोशन हो इंसानियत का ज़ज्बा , कुछ ऐसा कर जाएँ

टूटें न रिश्तों की माला के मोती , कुछ ऐसा कर जाएँ
रोशन हो रिश्तों का कारवाँ , कुछ ऐसा कर जाएँ

सबके चहरों पर नूर आ जाए, कुछ ऐसा कर जाएँ
संस्कृति और संस्कारों से पोषित हो समाज , कुछ ऐसा कर जाएँ

चमक उठें दरबार सभी देवालयों के , कुछ ऐसा कर जाएँ
रोशन हो जाएँ चर्च, गुरद्वारे और मस्ज़िद , कुछ ऐसा कर जाएँ

नसीब हो नवोदित रचनाकारों को खुला आसमां , कुछ ऐसा कर जाएँ
राजभाषा हिंदी को विश्व मंच पर आसीन करें, कुछ ऐसा कर जाएँ

यादों का सफ़र खुशनुमा हो, कुछ ऐसा कर जाएँ
किसी का भी दिल न टूटे , कुछ ऐसा कर जाएँ

बदनुमा यादों को भुला सकें , कुछ ऐसा कर जाएँ
सबके दिलों में राज कर सकें, कुछ ऐसा कर जाएँ

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