लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Saturday, 29 August 2020

सब कुछ यहीं रह जाएगा

 सब कुछ यहीं रह जाएगा 


सब कुछ यहीं रह जाएगा 

तू साथ क्या ले जाएगा 

जी रहा है भ्रम में क्यूं 

बाद में पछताएगा 


महंगी कारें, महंगी अटारी 

सब कुछ यहीं रह जाएगा 

खुद को जो बस में किया न तूने 

तड़प  - तड़प रह जाएगा 


पाप की गठरी को न ढो 

मिटटी में मिल जाएगा 

क्यूं कर तू खुद को बहलाए  

भ्रम में पडा रह जाएगा 


खुशियों की तलाश के सफ़र का 

अंत नहीं मिल पायेगा 

पल  -  पल गिरेगा 

पल  - पल  मरेगा 


खूब तडपेगा तू 

साथ नहीं कोई जाएगा 

रिश्ते यहीं रह जायेंगे 

साथ कुछ न जाएगा 


क्यूं कर खुशियों का 

अम्बर सजाना चाहता है 

गिरता, उठता और फिर गिरता 

क्या जताना चाहता है 


क्या लाया था जो है खोया  

कुछ न साथ तेरे जाएगा 

तेरे न तेरे साथ होंगे 

अकेला ही तू जाएगा 


नेकियों का लहरा ले परचम 

पाकीजगी को पायेगा 

उस खुदा के दर का एक दिन 

नूर तू कहलायेगा  


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