लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 18 March 2019

मैं तेरे दर का नूर हो जाऊं ऐ मेरे खुदा


मैं तेरे दर का नूर हो जाऊं ऐ मेरे खुदा

मैं तेरे दर का नूर हो जाऊं ऐ मेरे खुदा
मैं सबके दिलों का शुरूर हो जाऊं ऐ मेरे खुदा

मुझ पर तेरा करम हो जाए ऐ मेरे खुदा
मैं जहां भी रहूँ तेरा साथ हो ऐ मेरे खुदा

तेरे हर एक करम को इबादत समझा क़ुबूल करूं ऐ मेरे खुदा
मैं जहां भी रहूँ सुकूँ अता कर ऐ मेरे खुदा

मुझे तुझसे मुहब्बत हो जाए ऐ मेरे खुदा
तेरे बन्दों से मुझे आशिकी हो जाए ऐ मेरे खुदा

तेरे हर बन्दे में तेरा अक्स नज़र आये ऐ मेरे खुदा
हर एक शख्स को अपना शागिर्द कर ऐ मेरे खुदा

तेरी इस कायनात से मुझे निस्बत हो ऐ मेरे खुदा
मेरा नसीब तेरे करम से रोशन हो ऐ मेरे खुदा

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