लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 23 January 2018

नाकामियों के दौर से

नाकामियों के दौर से

नाकामियों के दौर से , खुद को बचाकर
आशाओं का एक कारवाँ रोशन करें ,तो अच्छा हो

असफलताओं के दौर से गुजरकर
उम्मीद का एक दीपक रोशन करें ,तो अच्छा हो

गिरते हैं शेरे - सवार ही मैदाने जंग में
गिरकर भी जोश बरकरार रखें ,तो अच्छा हो

क्या करें खुद से गिला , खुद की नाकामियों से
खुद की कोशिशों पर एतबार करें , तो अच्छा हो

दो चार गम भी मिलें , तो उफ कैसी
अपनी कोशिशों को अपनी जागीर कर लें , तो अच्छा हो

कायरों की तरह डरकर , पीछे हटना कैसा
अपने प्रयासों से खुद को बुलंद कर लें, तो अच्छा हो

खुद को बताओ अपना दोस्त , न समझो दुश्मन
अपने भीतर के दुश्मन को मिटा के आगे बढ़ों , तो अच्छा हो

नाकामियों के दौर से , खुद को बचाकर
आशाओं का एक कारवाँ रोशन करें ,तो अच्छा हो






No comments:

Post a Comment