लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 20 December 2016

अपने जीवन को यूं न उलझाओ



अपने जीवन को यूं उलझाओ

अपने जीवन को , यूं उलझाओ
जीवन गीत रचो, और गुनगुनाओ

कामनाओं में , खुद को उलझाओ
इबादत के गीत रचो , और गुनगुनाओ

खुद को विलासिता,  में उलझाओ
थोड़ा सा वक़्त खुदा के बन्दों की , खिदमत में लगाओ

अपने जीवन को , ग़मों के सागर में यूं डुबाओ
खुद की परवाह करो , खुद को समझाओ

अपने जीवन को मायामोह , में उलझाओ
स्वयं का उद्धार करो, और मोक्ष की राह पर बढ़ते जाओ

स्वयं को अविश्वास के , बादलों में उलझाओ
स्वयं को पल्लवित कर , उत्कर्ष की राह पर बढ़ते जाओ

किसी और के आदर्शों का पल्ला , पकड़ क्यों चलते हो तुम
स्वयं को पुष्पित करो, आदर्श की राह निर्मित करते जाओ

लोगों के अभिनंदन में कब तक,  बजाते रहोगे तालियाँ
स्वयं पर विश्वास करो, और अभिनंदन राह पर बढ़ते जाओ






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