लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 12 July 2015

इस दुनिया में जीना है तो


इस दुनिया में जीना है तो

इस दुनिया में जीना है तो , अधिकारों हित लड़ना सीखो
सम्मान धरा पर पाना है तो, कर्म राह पर चलना सीखो

जीवन जीने का नाम है, हर पल आगे बढ़ना सीखो
दो पल सुखमय जीना है तो, सत्य राह पर चलना सीखो

देश प्रेम हित मरना है तो, मातृभूमि पर वरना सीखो
चिंताओं से लड़ना है तो, मन को शांत बनाना सीखो

आसमान को छूना है तो, गिर--गिर कर तुम उठना सीखो
चाँद तुम्हारे क़दमों में हो, ऐसे प्रयास तुम करना सीखो

धरती पर हों कदम तुम्हारे, स्वाभिमान हित लड़ना सीखो
स्वाभिमानी हो जीना है तो, कर्तव्य राह पर चलना सीखो

अभिनन्दन तेरा भी होगा, सच को आदर्श बनाना सीखो
मंगल कर्म सभी हों तेरे, धर्म राह पर चलना सीखो

पावन, मंगल छवि हो तेरी, संस्कार तुम वरना सीखो
शुभिंतक सभी हों तेरे, मानवता को धर्म बनाना सीखो

धर्म राह बलि- बलि जाना हो तो, धर्म से मोह लगाना सीखो
मोक्ष राह हो ध्येय तुम्हारा, परमेश्वर से जुड़ना सीखो







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