लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 7 May 2019

गीत लबों पर सजा लूं , फिर चले जाना




गीत लबों पर सजा लूं , फिर चले जाना

गीत लबों पर सजा लूं, फिर चले जाना
चंद लम्हे तुझ संग बिता लूं , फिर चले जाना

नज़रों में तेरी डूब लूं मैं , फिर चले जाना
लबों के तेरे चूम लूं मैं , फिर चले जाना

बाहों को तेरी थाम लूं मैं , फिर चले जाना
कुछ पल बाहों में बिता लूं , फिर चले जाना

कुछ पल तेरी जुल्फ़ें सवारूँ , फिर चले जाना
माथे को तेरे चूम लूं मैं , फिर चले जाना

आहिस्ता – आहिस्ता तेरे करीब आ लूं , फिर चले जाना
दूरियां कुछ पल मिटा लूं , फिर चले जाना

तेरी मुहब्बत में खुद को मजनू कर लूं , फिर चले जाना
तेरी मुस्कान को अपनी अमानत कर लूं , फिर चले जाना

खुशनुमा यादों का कारवाँ सजा लूं , फिर चले जाना
मुहब्बत के खुदा को खुद से मिला दूं , फिर चले जाना

दर्द दिल का मैं मिटा लूं , फिर चले जाना
तुझको मैं तुझसे मिला दूं , फिर चले जाना

गीत लबों पर सजा लूं, फिर चले जाना
चंद लम्हे तुझ संग बिता लूं , फिर चले जाना

नज़रों में तेरी डूब लूं मैं , फिर चले जाना
लबों के तेरे चूम लूं मैं , फिर चले जाना



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