लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 28 May 2018

अपने परायों के बीच

अपने परायों के बीच


अपने परायों के बीच झूलती , इस जिन्दगी में
संवैदनाओं की आस , अभी बाकी है

पिघलते आंसुओं और ठहाकों के बीच झूलती , इस जिन्दगी में
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है

टूटते रिश्तों और प्रगाढ होते नए रिश्तों के बीच झूलती , इस जिन्दगी में
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है

चरमराते संस्कृति , संस्कार और आधुनिकता के पालने में झूलती , इस जिन्दगी में
संवैदनाओं की आस , अभी बाकी है

लेखन को जिन्दगी कहने वाले और जिन्दगी का एहसास जगाने वालों से
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है

उस खुदा को थाहने वालों से , इंसानियत की राह दिखाने वालों से
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है

आँसुओं के समंदर में डूबे हैं जो, सिसकती साँसों का कारवाँ लिए जी रहे हैं जो उनके दिलों में भी ,
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है

जिसके वजूद से हमारा वजूद , उस खुदा की पाक दुनिया में , हम सबके लिए
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है

दिलों को रोशन कर रहे उस खुदा का करम , उसके बन्दों की पाकीज़ा रूहों से
संवेदनाओं की आस , अभी बाकी है


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