लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Tuesday, 5 January 2021

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

टूटा था दिल वहां से, या संभला था दिल जहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

संवरे थे मेरे सपने वहां से, या बिखरे थे वहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

जुड़ी थी यादें वहां से, या टूटे थे रिश्ते जहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

जब रोशन हुआ था दिल वहां से, या तनहा हुआ था जहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

चंद कदम चले थे वहां से, या जुदा हो गए थे जहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

रोशन हुआ था मुहब्बत का कारवाँ वहां से, या बिखरे थे सपने वहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

जब पहली बार हम मिले थे वहां से, या अंतिम दीदार हुए थे वहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

जब रोशन हुई थी कलम वहां से, या उस खुदा की इनायत का कारवाँ रोशन हुआ वहां से

 

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

कहाँ से छेड़ूँ फ़साना , कहाँ तमाम करूँ

 

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