लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 7 December 2020

तेरे चरणों में पुष्प बनकर

 

तेरे चरणों में पुष्प बनकर

 

तेरे चरणों में पुष्प बनकर मैं बिखर जाऊं तो अच्छा हो

तेरे चरणों में दीप बनकर मैं प्रज्जवलित हो जाऊं तो अच्छा हो

 

तेरे चरणों का नूर बनकर मैं खिल जाऊं तो अच्छा हो

पीर दिल की भुलाकर मैं तुझ पर समर्पित हो जाऊं तो अच्छा हो

 

तेरी इबादत के गीत बनकर मैं सँवर जाऊं तो अच्छा हो

तेरा शागिर्द बनकर मैं रोशन हो जाऊं तो अच्छा हो

 

तेरे मंदिर के बुर्ज़ पर ध्वज बन लहर जाऊं तो अच्छा हो

तेरे दीदार की आरज़ू जो पूरी हो जाए तो अच्छा हो

 

तेरे करम का सिला नसीब हो जाए तो अच्छा हो

तेरे करम से भाग्य मेरा भी रोशन हो जाए तो अच्छा हो

 

तेरे बन्दों की खिदमत में मेरी जिन्दगी गुजर जाए तो अच्छा हो

तेरे नाम के साथ खामोश हो जाए जुबाँ मेरी तो अच्छा हो

 

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