किसी का अपनापन जिन्दगी मेंखुशियों के रंग भर देता हैफूलों सी महक उठती है जिन्दगीग़मों से कोसों दूर कर देता है |
क्यूं कर किसी के गम में
शरीक न हों हम
गम किसी एक का नहीं
ग़मों से नाता , सभी का होता है ||
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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