लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Monday, 17 July 2023

पावन तेरे चरण , पावन तेरी छवि कान्हा - भजन

 पावन तेरे चरण , पावन तेरी छवि कान्हा

आ गया हूँ तेरे चरणों में , अपना बना लो कान्हा

भक्ति रस में डूबकर , निखर जाऊँ मैं
चरणों में मुझे रख लो , अपना शागिर्द बना लो कान्हा

तेरी सूरत तेरी छवि पर , मोहित हो गया हूँ मैं
अपनी भक्ति के रंग में रंग दो , सुदामा समझ के कान्हा

ग्वालनें सभी आशिक हुईं , मोहक छवि पर तेरी
एक बार वंशी बजा दो , ग्वालों के प्यारे कान्हा

आशिकी में तेरी हम हुए , कुछ इस तरह घायल
इक बार तो सबको , दरश दिखा दो कान्हा

जी रहे हैं सभी प्राणी , इक आस में तेरी
कृपा बरसा दो सब पर , नन्द के दुलारे कान्हा

कोई कहे कृष्ण तुझको , कोई कहे कन्हैया
भक्तों के प्यारे सखा तुम , पार लगा दो नैया

खेवनहार हो तुम , प्रजापालक हो सभी के
पार लगा दो जीवन नैया , मोक्ष राह दिखाओ कान्हा

पावन तेरे चरण , पावन तेरी छवि कान्हा
आ गया हूँ तेरे चरणों में , अपना बना लो कान्हा

भक्ति रस में डूबकर , निखर जाऊँ मैं
चरणों में मुझे रख लो , अपना शागिर्द बना लो कान्हा


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