लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम

लेखक परिचय - अनिल कुमार गुप्ता अंजुम
अनिल कुमार गुप्ता अंजुम पिछले 20 वर्षों से लेखन से जुड़े गुए हैं और अभी तक इनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं | तीन लेख भी पुस्तकों के माध्यम से प्रकाशित हो चुके हैं | करीब 1500 से अधिक रचनाएँ, 25 से अधिक कहानियां, 30 से अधिक लेख, विचार, शायरी, भजन, गीत आदि का सृजन कर चुके हैं | जन्म से ये जबलपुर (मध्य प्रदेश ) हैं और अभी पंजाब में रह रहे हैं |

Sunday, 28 June 2015

बनाकर अपना मुझको , वो कहीं गुम हो गए

१.

बनाकर अपना मुझको , वो कहीं गुम हो
गए

हम हैं कि अपनी यादों में , उनकी  तलाश
करते हैं


२.


दिल की आवाज़, दिल ही बेहतर जाने

दिल की दुनिया का अपना ही खुदा होता है 

3.

ज़ख्म दिल के भरेंगे एक दिन, उम्मीद नहीं

दिल का हर एक ज़ख्म ,लाइलाज होता है

4.


जुकाम हुआ नहीं है मुझको, जो ठीक हो जाए

ये दिल का रोग है, जिसका कोई इलाज़ नहीं








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