इक दिन मेरी मज़ार पर आकर वो ये बोले
ए जाने वाले इक बार मिल के तो जाते
कुछ वादे कर जाते कुछ अफ़साने लिख जाते
दे जाते कुछ निशानियाँ मेरा घर आबाद कर जाते
-अनिल कुमार गुप्ता-
मेरी रचनाएं मेरी माताजी श्रीमती कांता देवी एवं पिताजी श्री किशन चंद गुप्ता जी को समर्पित
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